गोरखनाथ मंदिर पहुंची शालिग्राम शिलाएं, फूलों की बारिश कर विधि-विधान से की गई पूजा, भक्तों ने लगाए जय श्री राम के नारे

अनूप शुक्ला
गोरखपुर
: अयोध्या में बन रहे भव्य राम मंदिर में प्रभु श्री राम और मां सीता की मूर्तियों के निर्माण में नेपाल के काली गंडक से निकली करोड़ वर्ष पुरानी विशाल शिलाओं का प्रयोग किया जाएगा। मंगलवार को अयोध्या से पहले ये शिलाएं गोरखपुर पहुंची। कुशीनगर और गोरखपुर की सीमा पर शिलाओं का हजारों की संख्या में भक्त इंतजार कर रहे थे। शिलाएं पहुंचते ही भक्तों ने “जय श्री राम” के नारे लगाने शुरू कर दिए। वहीं इसके स्वागत में फूलों की बारिश की गई। बता दें कि इस दौरान जमकर आतिशबाजी भी की गई। हजारों भक्तों को भीड़ के साथ चल रही पवित्र शिलाएं रात 12.45 बजे के लगभग गोरखनाथ मंदिर पहुंची।

गोरखनाथ मंदिर में शिलाओं का विधि-विधान से हुआ पूजन
शिला रथ के गोरखनाथ मंदिर पहुंचते ही जय श्रीराम के नारे से गूंजने लगा। इस दौरान हजारों की संख्या में महिला और पुरुषों ने शिलाओं पर माथा टेका। शिलाओं को छूने की लोगों में होड़ मची रही। वहीं गोरखनाथ मंदिर के प्रधान पुजारी योगी कमलनाथ, देवीपाटन मंदिर तुलसीपुर के महंत योगी मिथिलेश नाथ समेत अन्य संतों ने विधि-विधान से शालिग्राम शिलाओं का पूजन कर स्वागत किया। बता दें कि गोरखनाथ मंदिर प्रबंधन ने शिलाओं के पूजन के लिए पहले से ही तैयारी कर रखी थी। वहीं देवशिला रथ के साथ आने वाले लोगों के रुकने की व्यवस्था हिंदू सेवाश्रम में की गई। शिलाओं के रथ को मंदिर परिसर में सुरक्षित खड़ा किया गया।

नेपाल से आ रही हैं शिलाएं
गोरखनाथ मंदिर में ही देवशिला रथ के रात्रि विश्राम के बाद बुधवार की सुबह संतों ने विधि-विधान से रथ को अयोध्या के लिए रवाना किया। रथ के अयोध्या रवाना होने के दौरान भी सुबह से ही गोरखनाथ मंदिर में भक्तों की भारी भीड़ मौजूद रही। बता दे कि वर्तमान में भारत और चीन के बीच चल रही तनातनी के दौरान भारत और नेपाल के आध्यात्मिक रिश्ते औऱ मजबूत हो रहे हैं। नेपाल के काली गंडक से निकले पवित्र पत्थर से अयोध्या में श्री राम, मां सीता की मूर्तियों के निर्माण से रिश्तों की मजबूत कड़ी जुड़ी है। बता दें कि एक शिला का वजन 26 टन जबकि दूसरे का 14 टन है। यानी कुल मिलाकर दोनों शिलाओं का वजन 40 टन है।

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